Karnataka Veterinary Recruitment Scam को लेकर कर्नाटक की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की आंतरिक जांच पर सवाल उठाते हुए मामले की CBI जांच या कर्नाटक हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि वेटरनरी अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं और कुछ उम्मीदवारों से कथित रूप से ₹80 लाख तक की रिश्वत मांगी गई। हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र जांच या न्यायालय द्वारा पुष्टि नहीं हुई है।
Karnataka Veterinary Recruitment Scam क्या है?
Karnataka Veterinary Recruitment Scam कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) द्वारा वेटरनरी अधिकारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के आरोपों से जुड़ा मामला है। BJP ने दावा किया है कि भर्ती प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका रही और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। वहीं, KPSC ने आरोप सामने आने के बाद अंतिम चयन सूची रोक दी है और आंतरिक जांच शुरू की है।

BJP ने CBI जांच की मांग क्यों की है?
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक (R Ashoka) ने KPSC अध्यक्ष को पत्र लिखकर स्वतंत्र जांच की मांग की है। BJP का कहना है कि–
- KPSC की आंतरिक जांच निष्पक्ष नहीं मानी जा सकती।
- मामले की जांच CBI या हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में होनी चाहिए।
- भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करने के लिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
आर. अशोक ने अन्य विपक्षी नेताओं और अभ्यर्थियों के प्रतिनिधियों के साथ KPSC अध्यक्ष और सचिव से मुलाकात कर भी यह मांग दोहराई।
Karnataka Veterinary Recruitment Scam में क्या आरोप लगाए गए हैं?
विवाद 342 नियमित पदों और 58 बैकलॉग पदों सहित कुल 400 पदों की भर्ती से जुड़ा है। आरोपों के अनुसार–
- कुछ उम्मीदवारों से नौकरी दिलाने के बदले ₹80 लाख तक की मांग की गई।
- कथित बिचौलियों के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया प्रभावित की गई।
- कुछ ऑडियो, फोटो और वीडियो सामने आए हैं, जिन्हें शिकायतकर्ता कथित अनियमितताओं का प्रमाण बता रहे हैं।
- कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले कथित रूप से दूसरे राज्यों में ले जाकर प्रश्नपत्र और तैयारी उपलब्ध कराई गई।
महत्वपूर्ण: इन आरोपों की स्वतंत्र जांच अभी जारी है और इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
KPSC ने क्या कार्रवाई की है?
आरोप सामने आने के बाद KPSC ने–
- वेटरनरी अधिकारियों की भर्ती की अंतिम चयन सूची रोक दी।
- मामले की आंतरिक जांच शुरू की।
- पुलिस में दर्ज शिकायतों के आधार पर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
यह कार्रवाई मीडिया रिपोर्टों और शिकायतों के बाद की गई।
₹800 करोड़ घोटाले का दावा कितना सही है?
BJP नेता आर. अशोक ने दावा किया है कि यदि सभी 400 पदों में कथित रूप से रिश्वत ली गई हो, तो पूरे मामले का आकार ₹800 करोड़ तक पहुंच सकता है। हालांकि–
- यह विपक्ष द्वारा लगाया गया आरोप है।
- जांच एजेंसियों ने अभी तक ₹800 करोड़ के घोटाले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
- मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
अभ्यर्थियों और भर्ती प्रक्रिया पर क्या असर पड़ा?
इस विवाद का असर हजारों अभ्यर्थियों पर पड़ा है। संभावित प्रभाव
- अंतिम चयन सूची जारी नहीं हो सकी।
- भर्ती प्रक्रिया में देरी हुई।
- उम्मीदवारों के बीच पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे।
- निष्पक्ष भर्ती की मांग और तेज हुई।
आगे क्या हो सकता है?
BJP ने चेतावनी दी है कि यदि स्वतंत्र जांच के आदेश नहीं दिए गए तो वह राज्यव्यापी आंदोलन करेगी।
दूसरी ओर, जांच पूरी होने तक–
- पुलिस और संबंधित एजेंसियां शिकायतों की जांच करेंगी।
- KPSC की आंतरिक जांच जारी रहेगी।
- सरकार आगे स्वतंत्र जांच का फैसला ले सकती है या मौजूदा प्रक्रिया जारी रख सकती है।
निष्कर्ष
Karnataka Veterinary Recruitment Scam ने कर्नाटक की भर्ती प्रक्रिया और KPSC की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष CBI जांच की मांग कर रहा है, जबकि KPSC ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और किसी भी व्यक्ति या संस्था की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
FAQs:
यह KPSC द्वारा वेटरनरी अधिकारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं, रिश्वतखोरी और बिचौलियों की भूमिका से जुड़े आरोपों का मामला है, जिसकी जांच जारी है।
BJP का कहना है कि KPSC की आंतरिक जांच निष्पक्ष नहीं होगी, इसलिए मामले की जांच CBI या हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में होनी चाहिए।
विपक्ष का दावा है कि यदि सभी 400 पदों में कथित रूप से रिश्वत ली गई हो तो घोटाले का आकार ₹800 करोड़ तक हो सकता है। इस दावे की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जांच के दायरे में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी, कथित बिचौलिए और अन्य संबंधित व्यक्ति आ सकते हैं। अंतिम निर्णय जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।
मामले में पुलिस जांच और KPSC की आंतरिक जांच शुरू हो चुकी है। विपक्ष स्वतंत्र CBI या न्यायिक जांच की मांग कर रहा है।

