Groundwater Levels India: 19% कम बारिश के बावजूद क्यों नहीं सूख रहे देश के भूजल भंडार? रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर

Groundwater Levels India

देश में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अब तक 19% कम बारिश दर्ज की गई है, लेकिन राहत की बात यह है कि Groundwater Levels India यानी भारत के भूजल भंडार फिलहाल काफी हद तक स्थिर बने हुए हैं। कृषि मंत्रालय की ताज़ा Crop Weather Watch Group (CWWG) रिपोर्ट के मुताबिक, देश के लगभग 88% भूजल निगरानी कुओं में जल स्तर सामान्य श्रेणी में पाया गया है। इसका मतलब है कि फिलहाल किसानों और सिंचाई व्यवस्था पर मानसून की कमी का गंभीर असर नहीं पड़ा है।हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि वर्षा में कमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर अगले वर्ष भूजल स्तर पर देखने को मिल सकता है।

19% कम बारिश के बावजूद भूजल स्तर स्थिर कैसे है?

कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में भूजल भंडार की स्थिति फिलहाल संतोषजनक बनी हुई है। देशभर में कुल 9,085 भूजल निगरानी कुओं का अध्ययन किया गया, जिनमें से 7,977 कुओं में जल स्तर सामान्य पाया गया। मुख्य आंकड़े:

  • 88% भूजल निगरानी कुएं सामान्य श्रेणी में हैं।
  • केवल 12.2% क्षेत्रों में भूजल संकट के संकेत मिले हैं।
  • लगभग 69% कुओं में जल स्तर जमीन से 10 मीटर के भीतर है।
  • केवल 4% कुओं में जल स्तर 40 मीटर से अधिक गहराई पर पाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले वर्षों में हुए पर्याप्त भूजल पुनर्भरण (Recharge) का लाभ इस वर्ष भी मिल रहा है।

Groundwater Levels India

Groundwater Levels India पर कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट क्या कहती है?

Groundwater Levels India पर जारी Crop Weather Watch Group (CWWG) रिपोर्ट के अनुसार, प्री-मानसून 2026 Groundwater Drought Index में भूजल संकट केवल कुछ सीमित क्षेत्रों तक ही पाया गया है। कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार:
जहां ट्यूबवेल आधारित सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध है, वहां किसान मानसून में बारिश की कमी होने पर भी सामान्य सिंचाई कर सकते हैं।”

इसका अर्थ है कि खरीफ फसलों पर तत्काल कोई बड़ा संकट नहीं दिखाई दे रहा है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां भूजल उपलब्ध है।

किन राज्यों में भूजल संकट सबसे अधिक है?

हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर तस्वीर सकारात्मक दिखाई दे रही है, लेकिन कुछ राज्यों में भूजल दोहन चिंता का विषय बना हुआ है। 2025 के आंकड़ों के अनुसार:

राज्य

भूजल दोहन (%)

पंजाब

156.36%

राजस्थान

147.11%

हरियाणा

136.75%

इन राज्यों में भूजल का उपयोग उसकी प्राकृतिक पुनर्भरण क्षमता से कहीं अधिक किया जा रहा है, जिससे भविष्य में जल संकट की संभावना बढ़ सकती है।

 

मानसून की कमी का असर कब दिखाई देगा?

विशेषज्ञों के अनुसार, भूजल स्तर पर बारिश की कमी का असर तुरंत नहीं दिखाई देता। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. डी.के. सिंह के मुताबिक:

  • भूजल स्तर बारिश के साथ धीरे-धीरे बदलता है।
  • बारिश की कमी का वास्तविक प्रभाव 5 से 6 महीने बाद सामने आता है।
  • यदि इस वर्ष मानसून कमजोर रहता है, तो अगले वर्ष भूजल पुनर्भरण प्रभावित हो सकता है।

इसलिए वर्तमान स्थिति राहत देने वाली जरूर है, लेकिन भविष्य के लिए सतर्क रहना भी उतना ही आवश्यक है।

 

देश में सबसे अधिक वर्षा की कमी कहां दर्ज हुई?

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 1 जून से 22 जुलाई 2026 तक मानसून में कुल 19% की कमी दर्ज की गई है। क्षेत्रवार वर्षा की स्थिति:

  • पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत – 32% कमी
  • दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत –  26% कमी
  • उत्तर-पश्चिम भारत – 13% कमी
  • मध्य भारत –  9% कमी

वहीं, आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत में मानसून के सक्रिय रहने की संभावना जताई गई है।

 

किन राज्यों में मिट्टी की नमी कम पाई गई है?

Crop Weather Watch Group रिपोर्ट के अनुसार, निम्नलिखित क्षेत्रों में मिट्टी की नमी औसत से कम पाई गई है:

  • बिहार
  • झारखंड
  • छत्तीसगढ़
  • पंजाब
  • हरियाणा
  • गुजरात
  • मराठवाड़ा
  • कर्नाटक
  • तेलंगाना
  • आंध्र प्रदेश
  • पूर्वी पश्चिम बंगाल
  • पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्से

यह स्थिति मानसून के असमान वितरण को दर्शाती है।

 

भूजल संरक्षण के लिए क्या करना जरूरी है?

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान स्थिरता को बनाए रखने के लिए निम्न कदम बेहद जरूरी हैं:

  • वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को बढ़ावा देना।
  • भूजल दोहन पर नियंत्रण।
  • सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों का उपयोग।
  • जल संरक्षण आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाना।
  • स्थानीय स्तर पर जल पुनर्भरण परियोजनाओं का विस्तार।

 

निष्कर्ष

Groundwater Levels India पर आई ताजा रिपोर्ट फिलहाल राहत की खबर लेकर आई है। 19% कम मानसूनी बारिश के बावजूद देश के अधिकांश हिस्सों में भूजल स्तर सामान्य बना हुआ है, जिससे खरीफ फसलों और सिंचाई व्यवस्था को तत्काल खतरा नहीं है। हालांकि, यदि वर्षा की कमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका प्रभाव अगले वर्ष भूजल पुनर्भरण और जल सुरक्षा पर पड़ सकता है। इसलिए वर्तमान स्थिति को सकारात्मक मानते हुए जल संरक्षण के प्रयासों को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।

FAQs:

पिछले वर्षों के भूजल पुनर्भरण और अधिकांश क्षेत्रों में पर्याप्त जल भंडारण के कारण भूजल स्तर फिलहाल सामान्य बना हुआ है।

यह रिपोर्ट कृषि मंत्रालय के Crop Weather Watch Group (CWWG) द्वारा जारी की गई है।

पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में भूजल दोहन सबसे अधिक दर्ज किया गया है।

वर्षा जल संचयन, सूक्ष्म सिंचाई और भूजल पुनर्भरण जैसी योजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इसका प्रभाव कुछ महीनों बाद भूजल स्तर और जल उपलब्धता पर दिखाई देता है।

यदि लगातार कम वर्षा होती है और भूजल पुनर्भरण प्रभावित रहता है, तो भविष्य में कुछ क्षेत्रों में जल संकट उत्पन्न हो सकता है।