Sonam wangchuk hunger Strike: प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों की मांगों को लेकर 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत बिगड़ने के बाद केंद्र सरकार की ओर से उनसे सीधा संपर्क किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार, 21 जुलाई की रात गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की।
यह मुलाकात उस दिन हुई, जब दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद वांगचुक को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से उनकी पसंद के निजी अस्पताल मेदांता में स्थानांतरित किया गया था। उन्हें ICU में भर्ती किया गया, जहां डॉक्टरों की विशेष टीम उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार दोनों केंद्रीय मंत्री रात करीब 11:30 बजे ICU पहुंचे और लगभग 10 मिनट तक वांगचुक के साथ रहे। हालांकि बैठक में हुई बातचीत का आधिकारिक विवरण अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

25 दिन की भूख हड़ताल के बाद सरकार से पहली सीधी मुलाकात
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल मंगलवार को 25वें दिन में प्रवेश कर गई थी। वह Cockroach Janta Party यानी CJP से जुड़े छात्र आंदोलन के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और परीक्षा सुधारों की मांग उठा रहे हैं।

वांगचुक ने संकेत दिया था कि यदि सांसद और राजनीतिक दल उन्हें भरोसा दें कि परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही का मुद्दा संसद के मानसून सत्र में उठाया जाएगा, तो वह भूख हड़ताल खत्म करने पर विचार कर सकते हैं। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और संगठन के दूसरे सदस्यों ने भी उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है।
जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की अस्पताल में हुई मुलाकात को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह 25 दिनों की भूख हड़ताल के दौरान केंद्र सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और वांगचुक के बीच पहली सीधी उच्चस्तरीय बातचीत थी। इससे एक दिन पहले नड्डा ने आंदोलन के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की थी और कहा था कि संवाद हमेशा अच्छा होता है।
रात 11:30 बजे ICU पहुंचे दोनों केंद्रीय मंत्री
मेदांता अस्पताल पहुंचने के बाद जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह सीधे ICU-8 में गए, जहां सोनम वांगचुक को निगरानी में रखा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों को कुछ समय के लिए बाहर जाने के लिए कहा गया और दोनों नेताओं ने वांगचुक से करीब 10 मिनट बात की।
इस बातचीत के दौरान किन मांगों पर चर्चा हुई, वांगचुक से भूख हड़ताल समाप्त करने का अनुरोध किया गया या सरकार की ओर से कोई औपचारिक आश्वासन दिया गया, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मुलाकात को किसी समझौते या सरकारी स्वीकृति के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी।
सरकार या वांगचुक की ओर से बैठक के बाद कोई विस्तृत संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया। उपलब्ध रिपोर्ट केवल इतना पुष्ट करती हैं कि दोनों मंत्री उनसे मिले और उनकी स्वास्थ्य स्थिति तथा आंदोलन से बने हालात के बीच बातचीत हुई।
हाईकोर्ट के आदेश पर सफदरजंग से मेदांता ले जाए गए
सोनम वांगचुक को पहले दिल्ली पुलिस ने 18 जुलाई को प्रदर्शन स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था। वह उस समय अपनी भूख हड़ताल के 21वें दिन में थे। उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने उन्हें परिवार की पसंद के अस्पताल में स्थानांतरित करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने मंगलवार को वांगचुक को तुरंत मेदांता अस्पताल ले जाने की अनुमति दी। अदालत के सामने केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार को स्थानांतरण पर कोई आपत्ति नहीं है।
अदालत ने माना कि लगातार भूख हड़ताल के कारण वांगचुक को निरंतर चिकित्सा निगरानी की जरूरत है और अस्पताल चुनने की उनकी चिंता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने इलाज के विकल्प को संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत उपलब्ध अधिकारों से भी जोड़ा।
शाम 6:40 बजे डिस्चार्ज, 7:30 बजे मेदांता पहुंचे
सफदरजंग अस्पताल ने सोनम वांगचुक को मंगलवार शाम करीब 6:40 बजे डिस्चार्ज किया। सभी मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और इलाज से जुड़े दस्तावेज मेदांता की मेडिकल टीम को सौंपे गए, ताकि उपचार की प्रक्रिया में कोई रुकावट न आए।
उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच एम्बुलेंस से गुरुग्राम ले जाया गया और वह करीब 7:30 बजे मेदांता अस्पताल पहुंचे। इसके बाद उन्हें ICU में भर्ती किया गया। वहां इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. सुशीला कटारिया की देखरेख में उनका उपचार शुरू हुआ।
दिल्ली हाईकोर्ट ने मेदांता को विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम गठित करने का निर्देश दिया था। इस टीम को वांगचुक की स्थिति की लगातार निगरानी करते हुए मान्य मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज करने को कहा गया।
ब्लड सेल कम होने और पोटैशियम गिरने से बढ़ी चिंता
सफदरजंग अस्पताल के अनुसार डिस्चार्ज के समय सोनम वांगचुक के महत्वपूर्ण शारीरिक संकेत यानी vital parameters स्थिर थे। इसके बावजूद उनमें pancytopenia की स्थिति बनी हुई थी और उनके खून में पोटैशियम का स्तर 3.4 mEq/L दर्ज किया गया था।

Pancytopenia में लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स तीनों की संख्या सामान्य से कम हो सकती है। लंबे समय तक भोजन न लेने से शरीर में पोषण और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन प्रभावित हो सकता है। वांगचुक के इलाज में डॉक्टर विशेष रूप से पोटैशियम और सोडियम के स्तर पर नजर रख रहे हैं।
पोटैशियम और सोडियम हृदय की धड़कन, नसों और मांसपेशियों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी होते हैं। पोटैशियम अत्यधिक कम होने पर हृदय की धड़कन अनियमित होने का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से डॉक्टरों ने उन्हें ICU में रखकर लगातार निगरानी का फैसला किया।
मेदांता पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें स्थिर और बातचीत की स्थिति में बताया। नए ब्लड टेस्ट भी कराए गए और रिपोर्ट के आधार पर उन्हें निजी वार्ड में स्थानांतरित करने पर विचार किया जाना था।
लंबा उपवास खत्म करना भी इलाज का संवेदनशील हिस्सा
25 दिन तक भोजन न लेने के बाद केवल भूख हड़ताल समाप्त कर देना भी सामान्य प्रक्रिया नहीं होती। डॉक्टरों को इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि भोजन दोबारा धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से शुरू किया जाए।
लंबे उपवास के बाद अचानक अधिक मात्रा में भोजन देने से शरीर के इलेक्ट्रोलाइट स्तर में तेजी से बदलाव हो सकता है। इस स्थिति को refeeding syndrome कहा जाता है, जिससे हृदय और दूसरे अंगों पर दबाव पड़ सकता है।
इसी कारण मेदांता की मेडिकल टीम के सामने दोहरी चुनौती है। उसे एक ओर वांगचुक की मौजूदा कमजोरी, ब्लड सेल और इलेक्ट्रोलाइट स्तर पर नजर रखनी है, वहीं भूख हड़ताल समाप्त होने की स्थिति में सुरक्षित तरीके से भोजन शुरू करने की तैयारी भी करनी होगी।
वांगचुक ने पुलिस कार्रवाई के बाद अनशन जारी रखने का फैसला किया
रिपोर्ट के अनुसार सोनम वांगचुक पहले साथी प्रदर्शनकारियों की अपील पर भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए तैयार हो गए थे। हालांकि 20 जुलाई को Chalo Sansad मार्च के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच टकराव के बाद उन्होंने अनशन जारी रखने का फैसला किया।
उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने अदालत की सुनवाई के बाद कहा था कि वांगचुक चाहते हैं कि संसद दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और छात्रों की मांगों पर संज्ञान ले। प्रदर्शनकारी समूहों ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने हिंसा, पथराव और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और अन्य थानों में कई FIR दर्ज की हैं। ये मामले कथित गैरकानूनी जमावड़े, पथराव, मारपीट, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, संसद सत्र के दौरान बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने और व्यापक आपराधिक साजिश जैसे आरोपों से जुड़े हैं।
कुछ मामलों में भारतीय न्याय संहिता, शस्त्र अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस ने कहा है कि वीडियो, CCTV फुटेज और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर जांच जारी है।
NEET विवाद से संसद और PM आवास तक पहुंचा आंदोलन
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल ऐसे समय में चल रही है, जब NEET पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं का मुद्दा संसद तथा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ चुका है।
मंगलवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई विपक्षी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के पास धरने पर बैठे थे। दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और बाद में रिहा कर दिया। विपक्ष ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय करने की मांग की।
कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे, छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने, पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई, प्रधानमंत्री से माफी और संसद में चर्चा की मांग उठाई है।
सरकार ने कहा है कि वह NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस पर छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
नड्डा की सक्रियता से सरकार ने संवाद का संकेत दिया
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने वांगचुक से मिलने से पहले दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती घायल प्रदर्शनकारियों से भी मुलाकात की थी। उन्होंने छात्र आंदोलन के प्रतिनिधियों से बातचीत की और संसद पहुंचते समय कहा कि संवाद हमेशा सकारात्मक होता है।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी इससे पहले राहुल गांधी से उनके धरने के दौरान बातचीत की थी। इसलिए दोनों मंत्रियों का वांगचुक से मिलना सरकार की ओर से अलग-अलग पक्षों से संवाद स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि सरकार की ओर से अब तक यह नहीं बताया गया कि आंदोलनकारियों की किन मांगों पर सहमति बनी है। केवल मुलाकात होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि परीक्षा सुधार, पुलिस कार्रवाई या शिक्षा मंत्री की जवाबदेही पर कोई अंतिम फैसला हो गया है।
मौजूदा आंदोलन लद्दाख की मांगों से अलग
सोनम वांगचुक को आमतौर पर लद्दाख के पर्यावरण, राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची और स्थानीय अधिकारों से जुड़े आंदोलनों के कारण जाना जाता है। वह लंबे समय से हिमालयी पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों की मांग उठाते रहे हैं।
हालांकि जून-जुलाई 2026 की यह भूख हड़ताल मुख्य रूप से NEET पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही से जुड़ी है। उपलब्ध रिपोर्टों में जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई 10 मिनट की मुलाकात में लद्दाख के मुद्दों पर चर्चा होने की कोई पुष्टि नहीं है।
इसलिए इस अस्पताल मुलाकात को लद्दाख से संबंधित किसी सरकारी बातचीत या समझौते से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
वांगचुक बोले- छात्रों पर कार्रवाई रुकी तो खत्म करेंगे भूख हड़ताल
सोनम वांगचुक ने 22 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के नाम एक लिखित अपील जारी करते हुए कहा कि वह भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए सरकार को प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या बदले की कानूनी कार्रवाई नहीं करने का स्पष्ट आश्वासन देना होगा।
वांगचुक ने अस्पताल में उनसे मिलने और अनशन खत्म करने की अपील करने के लिए दोनों मंत्रियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि मुलाकात के दौरान सरकार की ओर से परीक्षा पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने और जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा कराने पर सकारात्मक विचार करने का भरोसा दिया गया।
वांगचुक के अनुसार इस संसदीय चर्चा में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर विचार भी शामिल हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि सरकार ने इन मांगों को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है या केवल सकारात्मक विचार का आश्वासन दिया है।

उन्होंने 20 जुलाई के Chalo Sansad मार्च को शांतिपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। वांगचुक ने आशंका जताई कि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं को बाद में मुकदमों, उत्पीड़न या बदले की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
अपील में उन्होंने लिखा कि करीब 65 सांसदों ने अलग-अलग राजनीतिक दलों की ओर से उनसे संपर्क किया है। कुछ सांसद अस्पताल में उनसे मिल चुके हैं और अन्य के मिलने की संभावना है। इन सांसदों ने उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह करते हुए कहा कि उन्हें देश, शिक्षा और छात्रों के लिए आगे भी काम करना है।
वांगचुक ने कहा कि वह जीवित रहना चाहते हैं और अपने छात्रों तथा शिक्षा के काम में वापस लौटना चाहते हैं, लेकिन आंदोलन से जुड़े युवाओं को अकेला छोड़कर अनशन खत्म नहीं कर सकते। उन्होंने सरकार से बिना किसी अस्पष्टता के यह भरोसा देने की मांग की कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल किसी भी युवा के खिलाफ दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि ऐसा आश्वासन मिलने पर वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे और प्रदर्शनकारी छात्रों से भी फिलहाल आंदोलन रोककर सरकार के साथ संवाद शुरू करने की अपील करेंगे। लेकिन यदि सरकार की ओर से स्पष्ट भरोसा नहीं मिलता है तो वह अनिश्चितकाल तक भूख हड़ताल जारी रखने के लिए मजबूर होंगे।
वांगचुक ने यह भी उम्मीद जताई कि आंदोलन को दबाने के लिए आगे अत्यधिक पुलिस बल का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। उन्होंने अपनी अपील के अंत में कहा कि लोकतंत्र की असली परीक्षा इस बात से होती है कि सरकार अपने समर्थकों के साथ नहीं, बल्कि सवाल उठाने वाले युवा नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करती है।
स्वास्थ्य और आंदोलन के बीच फंसा अगला फैसला
सोनम वांगचुक ने अब तक भूख हड़ताल जारी रखने का रुख बनाए रखा है। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति स्थिर बताई है, लेकिन 25 दिनों के उपवास, pancytopenia और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के कारण मेडिकल जोखिम बना हुआ है।
CJP और विपक्षी सांसदों ने उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है। विपक्षी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल भी मेदांता अस्पताल जाकर उन्हें भरोसा दिलाने की तैयारी में है कि परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही का मुद्दा संसद में उठाया जाएगा।
अब अगला कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार और सांसद वांगचुक को कितनी स्पष्ट राजनीतिक या संसदीय प्रतिबद्धता देते हैं। साथ ही डॉक्टर उनकी सेहत को लेकर क्या सलाह देते हैं, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
FAQ
1. जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने सोनम वांगचुक से मुलाकात क्यों की?
दोनों मंत्री वांगचुक की बिगड़ती सेहत और 25 दिन से चल रही भूख हड़ताल के बीच उनसे मिलने मेदांता अस्पताल पहुंचे। मुलाकात को सरकार की संवाद प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, लेकिन बातचीत का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं हुआ है।
2. सोनम वांगचुक अस्पताल में क्यों भर्ती हैं?
वांगचुक 28 जून से प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में भूख हड़ताल कर रहे हैं। लंबे उपवास के कारण उनके ब्लड सेल और इलेक्ट्रोलाइट स्तर प्रभावित हुए, जिसके बाद उन्हें चिकित्सा निगरानी में भर्ती कराया गया।
3. मुलाकात के दौरान किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
दोनों मंत्रियों और वांगचुक के बीच करीब 10 मिनट बातचीत हुई, लेकिन इसकी विषयवस्तु की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी विशेष मांग, समझौते या आश्वासन का दावा नहीं किया जा सकता।
4. सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति कैसी है?
सफदरजंग से डिस्चार्ज के समय उनके vital parameters स्थिर थे। हालांकि उनमें pancytopenia बनी हुई थी और पोटैशियम स्तर 3.4 mEq/L था। मेदांता में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है।
5. लद्दाख से जुड़े कौन-से मुद्दे उठाए गए?
उपलब्ध जानकारी में अस्पताल की बैठक के दौरान लद्दाख के राज्य के दर्जे, छठी अनुसूची या पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की पुष्टि नहीं हुई है। मौजूदा भूख हड़ताल परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही पर केंद्रित है।
6. सरकार ने सोनम वांगचुक की मांगों पर कोई आश्वासन दिया है?
अब तक सरकार या वांगचुक की ओर से किसी ठोस आश्वासन या समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सरकार ने परीक्षा विवाद पर संसद में चर्चा की इच्छा जताई है, लेकिन आंदोलन की सभी मांगों पर फैसला सामने नहीं आया है।

