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भारत बना दुनिया का 5वां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश : चीन–पाकिस्तान कहां खड़े?

भारत ने एक बार फिर दुनिया के बड़े सैन्य खर्च करने वाले देशों में अपनी जगह बनाए रखी है। ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में भारत रक्षा क्षेत्र पर खर्च करने वाले देशों में पांचवें स्थान पर रहा। Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) की रिपोर्ट बताती है कि भारत ने 2025 में लगभग 92.

भारत बना दुनिया का 5वां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश : चीन–पाकिस्तान कहां खड़े?

भारत ने एक बार फिर दुनिया के बड़े सैन्य खर्च करने वाले देशों में अपनी जगह बनाए रखी है। ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में भारत रक्षा क्षेत्र पर खर्च करने वाले देशों में पांचवें स्थान पर रहा। Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) की रिपोर्ट बताती है कि भारत ने 2025 में लगभग 92.1 अरब डॉलर रक्षा पर खर्च किए, जो पिछले साल की तुलना में 8.9% ज्यादा है।

यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई जब देश ने सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारी को मजबूत करने पर जोर दिया। खासकर Operation Sindoor के बाद रक्षा तैयारियों को और तेज किया गया।

 

दुनिया में भारत की स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, भारत वैश्विक सैन्य खर्च का लगभग 3.2% हिस्सा रखता है। भारत से आगे सिर्फ चार देश हैं:

  • अमेरिका
  • चीन
  • रूस
  • जर्मनी

इनमें भी अमेरिका, चीन और रूस ने मिलकर दुनिया के कुल सैन्य खर्च का लगभग 51% हिस्सा खर्च किया, जो उनकी ताकत को दर्शाता है।

वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड खर्च

साल 2025 में दुनिया भर में रक्षा खर्च बढ़कर 2,887 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह 2024 की तुलना में 2.9% अधिक है।

यह खर्च वैश्विक GDP का करीब 2.5% है, जो 2009 के बाद सबसे ज्यादा माना जा रहा है। इसका मतलब साफ है कि दुनिया एक बार फिर तेजी से हथियारों और सुरक्षा पर निवेश बढ़ा रही है।

 

किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी?

रिपोर्ट के अनुसार:

  • यूरोप में रक्षा खर्च 14% बढ़कर 864 अरब डॉलर हो गया
  • एशिया-ओशिनिया क्षेत्र में 8.1% की बढ़ोतरी हुई और खर्च 681 अरब डॉलर पहुंच गया

यूरोप में यह बढ़ोतरी रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण देखी गई, जबकि एशिया में चीन और अन्य देशों की गतिविधियों ने खर्च बढ़ाया।

 

पड़ोसी देशों का क्या हाल?

भारत के पड़ोसी देश भी रक्षा खर्च बढ़ा रहे हैं:

  • चीन ने 336 अरब डॉलर खर्च किए और दूसरा स्थान बनाए रखा
  • पाकिस्तान ने अपना खर्च 11% बढ़ाकर 11.9 अरब डॉलर कर दिया

SIPRI के मुताबिक, भारत का रक्षा खर्च और हथियारों की खरीद काफी हद तक चीन और पाकिस्तान के साथ तनाव से प्रभावित होती है।

 

हथियारों के आयात में बदलाव

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक बना हुआ है, हालांकि इसमें थोड़ी गिरावट आई है।

2016-20 और 2021-25 के बीच हथियारों के आयात में 4% की कमी आई, लेकिन फिर भी भारत का हिस्सा 8.2% बना हुआ है।

एक दिलचस्प बदलाव यह है कि भारत अब धीरे-धीरे रूस पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है:

  • 2011-15: 70% हथियार रूस से
  • 2016-20: 51%
  • 2021-25: 40%

अब भारत फ्रांस, इज़राइल और अमेरिका जैसे देशों से भी खरीद बढ़ा रहा है, हालांकि रूस अभी भी सबसे बड़ा सप्लायर है।

 

बजट में बड़ा इजाफा

भारत सरकार ने 2026-27 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह पिछले साल की तुलना में 15% से ज्यादा की बढ़ोतरी है।

इसमें से 2.19 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च (capital expenditure) के लिए रखे गए हैं। यह पैसा कई क्षेत्रों में इस्तेमाल होगा:

  • लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर
  • युद्धपोत और पनडुब्बियां
  • मिसाइल और तोप
  • ड्रोन और आधुनिक तकनीक
  • निगरानी और स्मार्ट हथियार

इससे साफ है कि भारत अब अपनी सेना को आधुनिक बनाने पर तेजी से काम कर रहा है।

 

ऑपरेशन सिंदूर का असर

Operation Sindoor के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष में लड़ाकू विमान, ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ।

इस अनुभव के बाद भारत ने अपनी सैन्य तैयारी को और मजबूत करने का फैसला किया। इसी कारण 2025 में रक्षा खर्च में तेजी आई।

 

दुनिया में बढ़ती हथियारों की होड़

SIPRI के अनुसार, दुनिया एक नए “री-आर्मामेंट फेज” यानी फिर से हथियारों की दौड़ के दौर में प्रवेश कर रही है।

कुछ मुख्य कारण हैं:

  • रूस-यूक्रेन युद्ध
  • एशिया में बढ़ता तनाव
  • अमेरिका के सहयोगी देशों का रक्षा खर्च बढ़ाना
  • चीन का लगातार 31 साल से रक्षा बजट बढ़ाना

दिलचस्प बात यह है कि यूक्रेन अपने GDP का करीब 40% रक्षा पर खर्च कर रहा है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है।

 

अमेरिका का खर्च क्यों घटा?

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का रक्षा खर्च 2025 में 7.5% कम हुआ। इसका मुख्य कारण यह रहा कि उस साल यूक्रेन को नई सैन्य सहायता के लिए कोई बड़ा बजट मंजूर नहीं किया गया।

पिछले तीन सालों में अमेरिका ने यूक्रेन के लिए 127 अरब डॉलर की मदद मंजूर की थी, लेकिन 2025 में यह रफ्तार धीमी रही।

 

भारत के लिए इसका क्या मतलब?

भारत के लिए बढ़ता रक्षा खर्च कई मायनों में महत्वपूर्ण है:

  • सीमाओं की सुरक्षा मजबूत करना
  • आधुनिक हथियारों से लैस होना
  • दो मोर्चों (चीन और पाकिस्तान) पर तैयारी
  • वैश्विक स्तर पर ताकत दिखाना

लेकिन इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि रक्षा खर्च और विकास के बीच संतुलन बना रहे।

 

निष्कर्ष:

भारत का दुनिया में पांचवें सबसे बड़े सैन्य खर्च करने वाले देश के रूप में बने रहना उसकी बढ़ती रणनीतिक जरूरतों को दिखाता है। बदलते वैश्विक हालात और क्षेत्रीय तनाव के बीच यह कदम जरूरी भी माना जा रहा है।

हालांकि, दुनिया में बढ़ती हथियारों की दौड़ एक नई चिंता भी पैदा कर रही है।

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