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बजट 2026 की तैयारी तेज: प्रधानमंत्री मोदी ने अर्थशास्त्रियों और सेक्टोरल एक्सपर्ट्स से चर्चा की, नीति आयोग में हुई हाई-लेवल मीटिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 30 दिसंबर को नीति आयोग में प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों और क्षेत्रीय विशेषज्ञों के साथ बातचीत की। यह बैठक आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए सुझाव एकत्रित करने के उद्देश्य से आयोजित की

बजट 2026 की तैयारी तेज: प्रधानमंत्री मोदी ने अर्थशास्त्रियों और सेक्टोरल एक्सपर्ट्स से चर्चा की, नीति आयोग में हुई हाई-लेवल मीटिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 30 दिसंबर को नीति आयोग में प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों और क्षेत्रीय विशेषज्ञों के साथ बातचीत की। यह बैठक आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए सुझाव एकत्रित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी इस महत्वपूर्ण चर्चा में उपस्थित रहीं।


सुबह 11 बजे शुरू हुई इस बैठक में देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। चर्चा का केंद्र अगली पीढ़ी के सुधार, विकास के चालक और टैरिफ के प्रभाव पर केंद्रित रहा।

Preparations for Budget 2026

बैठक की प्रमुख थीम

इस परामर्श की विषयवस्तु थी - 'आत्मनिर्भरता और संरचनात्मक परिवर्तन: विकसित भारत का एजेंडा'। प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता और संरचनात्मक बदलाव पर विशेष बल दिया। चर्चा में विश्व स्तरीय क्षमता निर्माण और वैश्विक एकीकरण पर विस्तृत बातचीत हुई।

 

विशेषज्ञों से यह सुझाव मांगे गए कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किन-किन कदमों की आवश्यकता होगी। रोजगार सृजन और दीर्घकालिक विकास भी चर्चा के मुख्य बिंदु रहे।

प्रधानमंत्री के मुख्य संदेश

प्रधानमंत्री ने समूह को संबोधित करते हुए 2047 की यात्रा के लिए भारत के मूल स्तंभों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का विजन अब केवल सरकारी नीति नहीं रहा, बल्कि यह जनता की वास्तविक आकांक्षा बन गया है। यह बदलाव शिक्षा, उपभोग और वैश्विक गतिशीलता के विकसित पैटर्न में स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

 

प्रधानमंत्री ने दीर्घकालिक विकास को बनाए रखने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में मिशन मोड में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की नीति निर्माण और बजट व्यवस्था 2047 के विजन के साथ दृढ़ता से जुड़ी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश को वैश्विक कार्यबल और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बने रहना आवश्यक है।

 

प्रमुख आर्थिक मुद्दों पर चर्चा

बैठक में अर्थव्यवस्था के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई:

 

घरेलू उपभोग: देश में उपभोग के स्तर और उसे बढ़ाने के उपायों पर बातचीत हुई।

 

विनिर्माण वृद्धि: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के विकास और उसकी चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

 

निर्यात प्रदर्शन: भारत के निर्यात की स्थिति और उसे सुधारने के तरीकों पर चर्चा हुई।

 

टैरिफ संबंधी चुनौतियां: वैश्विक व्यापार में टैरिफ से उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों और उनके समाधान पर बात की गई।

 

अर्थशास्त्रियों के सुझाव

चर्चा के दौरान अर्थशास्त्रियों ने विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए रणनीतिक सुझाव साझा किए। चर्चा घरेलू बचत में वृद्धि, मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से संरचनात्मक परिवर्तन को तेज करने पर केंद्रित रही।

 

समूह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर विचार किया, जो विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने में सहायक हो सकता है। भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) के निरंतर विस्तार पर भी चर्चा हुई।

 

प्रतिभागियों ने नोट किया कि 2025 में विभिन्न क्षेत्रों में किए गए अभूतपूर्व सुधारों और आने वाले वर्ष में उनके और मजबूतीकरण से सुनिश्चित होगा कि भारत अपनी नींव को मजबूत करते हुए और नए अवसरों को खोलते हुए सबसे तेजी से बढ़ती वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में अपना मार्ग जारी रखे।

 

बैठक में उपस्थित प्रमुख व्यक्ति

इस महत्वपूर्ण बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अतिरिक्त नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीवीआर सुब्रह्मण्यम और अन्य सदस्य मौजूद थे।

 

कई प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और विशेषज्ञ इस चर्चा का हिस्सा बने, जिनमें शामिल थे: शंकर आचार्य, अशोक के भट्टाचार्य, एन आर भानुमूर्ति, अमिता बत्रा, जन्मेजय सिन्हा, अमित चंद्रा, रजनी सिन्हा, दिनेश कनाबर, बसंत प्रधान, मदन सबनवीस, आशिमा गोयल, धर्मकीर्ति जोशी, उमाकांत दास, पिनाकी चक्रवर्ती, इंद्रनील सेन गुप्ता, समीरन चक्रवर्ती, अभिमान दास, राहुल बजोरिया, मोनिका हलान और सिद्धार्थ सान्याल।

 

यह पूर्व-बजट परामर्श प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।

 

पहले हुए अन्य परामर्श

इससे पूर्व सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों से सुझाव एकत्रित किए थे। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME), पूंजी बाजार, स्टार्टअप, विनिर्माण, बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं, सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन जैसे क्षेत्रों से सुझाव लिए गए।

 

श्रमिक संघों और मजदूर समूहों के साथ भी बातचीत की गई। MyGov वेबसाइट के माध्यम से जनता से भी सुझाव आमंत्रित किए गए थे। यह व्यापक परामर्श प्रक्रिया बजट को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से की गई है।

 

बजट की तिथि

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026-27 संसद में प्रस्तुत करेंगी। इस बजट में वैश्विक अनिश्चितताओं और आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नीतियां तैयार की जाएंगी। विशेषज्ञों के सुझाव बजट घोषणाओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

 

संभावित प्रभाव और अपेक्षाएं

ये सुझाव विकसित भारत 2047 की दीर्घकालिक योजना में सहायक होंगे। व्यापक आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने, उभरती चुनौतियों से निपटने और सतत विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

 

बजट में रोजगार, निवेश और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देने वाली नीतियां आने की संभावना है। आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

 

नीति आयोग की भूमिका

नीति आयोग (नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) भारत सरकार का एक नीति थिंक टैंक है, जिसे 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर स्थापित किया गया था। यह नीतियों को तैयार करने और राज्यों को आर्थिक नीति निर्माण प्रक्रिया में शामिल करके सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

नीति आयोग के मुख्य कार्य:

  • नीति निर्माण: भारत के आर्थिक विकास के लिए दीर्घकालिक, रणनीतिक और क्षेत्रीय नीतियां तैयार करना
  • सहकारी संघवाद: केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वित नीति कार्यान्वयन के लिए सेतु की भूमिका
  • निगरानी और मूल्यांकन: योजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी और परिणामों का मूल्यांकन
  • थिंक टैंक: राष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए ज्ञान, नवाचार और विचार नेतृत्व प्रदान करना

 

नीति आयोग की संरचना:

  • अध्यक्ष: भारत के प्रधानमंत्री
  • उपाध्यक्ष: प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त
  • पदेन सदस्य: प्रधानमंत्री द्वारा मंत्रिमंडल से चार सदस्य नामित
  • शासी परिषद: सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल
  • मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO): प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त, दैनिक संचालन का प्रबंधन

 

निष्कर्ष:

यह परामर्श बैठक भारत के आर्थिक भविष्य को आकार देने में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री का आत्मनिर्भरता और संरचनात्मक परिवर्तन पर जोर यह दर्शाता है कि सरकार दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है।

 

विशेषज्ञों के सुझाव और सरकार की प्रतिबद्धता मिलकर आगामी बजट को एक ऐसा दस्तावेज बना सकती हैं जो न केवल तात्कालिक आर्थिक चुनौतियों का समाधान करे, बल्कि 2047 तक विकसित भारत बनाने के मार्ग को भी प्रशस्त करे।

 

1 फरवरी को प्रस्तुत होने वाला बजट इन सभी सुझावों और विचार-विमर्श का प्रतिबिंब होगा, जो भारत की आर्थिक यात्रा को नई दिशा और गति प्रदान करेगा।

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