Home / International / Lebanon Syria Pact: दशकों की खींचतान के बाद नए दौर की शुरुआत, आखिर क्या है लेबनान-सीरिया का ऐतिहासिक समझौता?
International

Lebanon Syria Pact: दशकों की खींचतान के बाद नए दौर की शुरुआत, आखिर क्या है लेबनान-सीरिया का ऐतिहासिक समझौता?

Lebanon Syria Pact: वर्षों तक तनाव, राजनीतिक दखल और सीमा विवादों से प्रभावित रहे लेबनान और सीरिया ने अब एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते में दोनों देशों ने एक-दूसरे की संप्रभुता (Sovereignty), स्वतंत्रता (Independence), क्षेत्रीय अखंडता (Territorial Integrity) और आंतरिक मामलों में

Lebanon Syria Pact: दशकों की खींचतान के बाद नए दौर की शुरुआत, आखिर क्या है लेबनान-सीरिया का ऐतिहासिक समझौता?

Lebanon Syria Pact: वर्षों तक तनाव, राजनीतिक दखल और सीमा विवादों से प्रभावित रहे लेबनान और सीरिया ने अब एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते में दोनों देशों ने एक-दूसरे की संप्रभुता (Sovereignty), स्वतंत्रता (Independence), क्षेत्रीय अखंडता (Territorial Integrity) और आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप (Non-Interference) के सिद्धांतों का पालन करने का वादा किया है।

यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे माहौल में दोनों पड़ोसी देशों का पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाना क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ़ सलाम और सीरिया के विदेश मंत्री असद हसन अल-शैबानी बेरूत में मुलाक़ात के दौरान सीरिया-लेबनान की संयुक्त समिति के गठन से जुड़ा दस्तावेज़ पकड़े हुए हैं। (Image: Reuters )

समझौता कैसे हुआ?

यह समझौता सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शैबानी की बेरूत यात्रा के दौरान हुआ। उन्होंने लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम, राष्ट्रपति जोसेफ औन और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, जिसमें भविष्य के संबंधों को नए आधार पर आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।

Image: धर्मराजिका स्तूप, तक्षशिला शहर के पास मौर्य-युग का एक बौद्ध स्तूप (2010)

बैठक के बाद दोनों देशों ने Joint Higher Committee for Cooperation and Partnership बनाने का फैसला किया। यह समिति दोनों देशों के मंत्रालयों के बीच सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, प्रशासनिक समन्वय और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने का काम करेगी।

लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा कि अब दोनों देशों के रिश्ते किसी राजनीतिक प्रभाव या दबाव पर नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं और सरकारी सहयोग के आधार पर आगे बढ़ेंगे।

Lebanon Syria Pact में क्या-क्या तय हुआ?

समझौते के तहत दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि वे एक-दूसरे की संप्रभुता और सीमाओं का सम्मान करेंगे। किसी भी देश के आंतरिक मामलों में दखल नहीं दिया जाएगा और भविष्य में सभी मुद्दों का समाधान सरकारी संस्थाओं के माध्यम से किया जाएगा।

इसके अलावा सीमा सुरक्षा को मजबूत करने, हथियारों और लोगों की तस्करी रोकने, संगठित अपराध पर नियंत्रण और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी सहमति बनी। दोनों देशों ने माना कि सीमा पार होने वाली अवैध गतिविधियां केवल एक देश की नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को प्रभावित करती हैं।

नई संयुक्त समिति इन सभी विषयों पर नियमित रूप से काम करेगी और दोनों सरकारों के बीच संवाद बनाए रखेगी।

लेबनान के राष्ट्रपति ने कहा यह नई शुरुआत 

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में "नई शुरुआत" बताया। उन्होंने कहा कि कई लोगों को आशंका थी कि सीरिया का नया नेतृत्व पुराने दौर की तरह लेबनान की राजनीति में प्रभाव स्थापित करने की कोशिश करेगा, लेकिन विदेश मंत्री की यात्रा ने इन आशंकाओं को काफी हद तक दूर कर दिया।

राष्ट्रपति औन के अनुसार सीरियाई प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि भविष्य में दोनों देशों के रिश्ते केवल State-to-State मॉडल पर आधारित होंगे। यानी अब किसी राजनीतिक दल, संगठन या गुट के माध्यम से नहीं बल्कि दोनों देशों की आधिकारिक सरकारों और संस्थाओं के जरिए ही सहयोग आगे बढ़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि लेबनान और सीरिया की स्थिरता एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। इसलिए दोनों देशों के लिए सहयोग और समन्वय बढ़ाना समय की जरूरत है।

 

दशकों तक क्यों तनावपूर्ण रहे दोनों देशों के रिश्ते?

लेबनान और सीरिया के संबंध शुरू से ही आसान नहीं रहे। दोनों कभी ओटोमन साम्राज्य का हिस्सा थे और बाद में फ्रांस के नियंत्रण में रहे। स्वतंत्रता मिलने के बाद भी दोनों देशों के बीच राजनीतिक प्रभाव और सुरक्षा को लेकर विवाद बना रहा।

साल 1976 से 2005 तक सीरियाई सेना लेबनान में तैनात रही और दमिश्क का लेबनान की राजनीति पर गहरा प्रभाव था। वर्ष 2005 में बड़े जनआंदोलन के बाद सीरियाई सेना को वापस जाना पड़ा, लेकिन दोनों देशों के संबंधों में अविश्वास लंबे समय तक बना रहा।

इसके बाद सीरिया के गृहयुद्ध और क्षेत्रीय संघर्षों ने भी दोनों देशों के रिश्तों को और जटिल बना दिया। दिसंबर 2024 में सीरिया में सत्ता परिवर्तन के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच नए रिश्तों की संभावना मजबूत हुई और अब यह समझौता उसी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

हिजबुल्लाह के मुद्दे पर दोनों देशों का संतुलित रुख

इस समझौते के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा हिजबुल्लाह को लेकर हुई। हाल के महीनों में अमेरिका की ओर से कई बार यह संकेत दिया गया था कि सीरिया, लेबनान में हिजबुल्लाह को निरस्त्र (Disarm) करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। लेकिन बेरूत में हुई बैठकों के दौरान सीरिया और लेबनान - दोनों ने इस मुद्दे पर बेहद संतुलित रुख अपनाया।

पत्रकारों ने जब पूछा कि क्या सीरिया अमेरिका के दबाव में आकर हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई करेगा, तो लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम और सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शैबानी ने इस सवाल पर कोई सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया।

हालांकि, इससे पहले सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शारा स्पष्ट कर चुके हैं कि यदि दोनों देशों के हित में होगा तो वे हिजबुल्लाह समेत लेबनान के सभी राजनीतिक दलों के साथ बातचीत करने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सीरिया का उद्देश्य लेबनान में किसी सैन्य कार्रवाई का नहीं, बल्कि शांति और स्थिरता का है।

 

इजरायल पर सीरिया का स्पष्ट संदेश

बेरूत यात्रा के दौरान सीरिया ने सार्वजनिक रूप से लेबनान के खिलाफ हो रहे इजरायली हमलों का विरोध दोहराया। विदेश मंत्री असद अल-शैबानी ने कहा कि सीरिया लेबनान पर होने वाले सभी हमलों, गोलाबारी और आम नागरिकों के विस्थापन का विरोध करता है। उन्होंने इसे अपनी सरकार की आधिकारिक नीति बताते हुए कहा कि दमिश्क भविष्य में भी इसी रुख पर कायम रहेगा।

यह बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सीरिया लेबनान के साथ राजनीतिक और कूटनीतिक सहयोग बढ़ाना चाहता है, लेकिन किसी नए सैन्य संघर्ष का हिस्सा नहीं बनना चाहता।

 

अमेरिका की भूमिका और बदलते क्षेत्रीय समीकरण

यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि सीरिया, लेबनान में हिजबुल्लाह के मुद्दे को संभाल सकता है। ट्रंप ने हाल के दिनों में यहां तक कहा था कि वह इस जिम्मेदारी को सीरिया को सौंपने के करीब हैं।

Image Credit: AP

इसके बावजूद दमिश्क ने साफ कर दिया कि उसकी प्राथमिकता किसी सैन्य अभियान में शामिल होना नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच स्थिर और संस्थागत संबंध स्थापित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि नया सीरियाई नेतृत्व अब खुद को क्षेत्रीय स्थिरता का साझेदार बनाकर पेश करना चाहता है।

 

नई सीरियाई सरकार की रणनीति

दिसंबर 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद सीरिया ने अपनी विदेश नीति में बदलाव के संकेत दिए हैं। नई सरकार लगातार यह संदेश दे रही है कि पड़ोसी देशों के साथ संबंध अब पुराने राजनीतिक हस्तक्षेप के मॉडल पर नहीं, बल्कि समानता और आपसी सम्मान के आधार पर आगे बढ़ेंगे।

राष्ट्रपति अहमद अल-शारा पहले भी कह चुके हैं कि सीरिया अब लेबनान में वही भूमिका नहीं निभाएगा जो अतीत में निभाता था। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए दोनों देशों ने संयुक्त उच्च स्तरीय समिति बनाने पर सहमति जताई है, जो सुरक्षा, व्यापार, प्रशासन और विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय को मजबूत करेगी।

 

पश्चिम एशिया की राजनीति पर क्या पड़ सकता है असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि Lebanon Syria Pact केवल दो देशों के रिश्तों तक सीमित नहीं है। यदि दोनों देश सीमा सुरक्षा, अवैध हथियारों की तस्करी, लोगों की गैरकानूनी आवाजाही और सुरक्षा सहयोग को प्रभावी ढंग से लागू करते हैं, तो इसका सकारात्मक असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ सकता है।

हालांकि चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। हिजबुल्लाह का भविष्य, इजरायल-लेबनान तनाव, बाहरी शक्तियों की रणनीति और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन आने वाले समय में इस समझौते की वास्तविक सफलता तय करेंगे।

 

निष्कर्ष

दशकों के अविश्वास के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को नए आधार पर स्थापित करने की एक महत्वपूर्ण कोशिश है। इस समझौते में संप्रभुता, गैर-हस्तक्षेप, सीमा सुरक्षा और संस्थागत सहयोग को प्राथमिकता दी गई है। यदि दोनों देश अपने वादों को व्यवहार में उतारने में सफल रहते हैं, तो यह समझौता केवल लेबनान और सीरिया के रिश्तों को ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में स्थिरता और कूटनीतिक सहयोग को भी नई दिशा दे सकता है।

FAQs:

लेबनान और सीरिया के बीच गैर-हस्तक्षेप समझौता क्या है?

यह एक द्विपक्षीय समझौता है जिसके तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करने, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और सुरक्षा व सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।

इस समझौते का उद्देश्य क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करना, सीमा सुरक्षा मजबूत करना, सरकारी स्तर पर सहयोग बढ़ाना और भविष्य के संबंधों को राजनीतिक हस्तक्षेप के बजाय संस्थागत आधार पर आगे बढ़ाना है।

दोनों देशों के संबंधों में यह समझौता क्यों महत्वपूर्ण है?

क्योंकि दशकों तक सीरिया का लेबनान की राजनीति पर प्रभाव रहा है। नए समझौते के जरिए दोनों देश समानता और आपसी सम्मान पर आधारित नए रिश्ते बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

इस समझौते का क्षेत्रीय सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

यदि समझौता प्रभावी ढंग से लागू होता है तो सीमा सुरक्षा मजबूत हो सकती है, तस्करी और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण बढ़ सकता है तथा पश्चिम एशिया में स्थिरता को बढ़ावा मिल सकता है।

लेबनान और सीरिया के संबंध पहले कैसे रहे हैं?

दोनों देशों के संबंध लंबे समय तक राजनीतिक हस्तक्षेप, सैन्य मौजूदगी, सीमा विवाद और क्षेत्रीय संघर्षों से प्रभावित रहे हैं। नया समझौता इन्हीं तनावपूर्ण संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

Was this article useful?