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Centre Portfolio Change: इस्तीफे से पहले बदला जा रहा था धर्मेंद्र प्रधान का विभाग ! जानिए क्या है CJP के दावे और BJP की सफाई का सच ?

Centre Portfolio Change: NEET पेपर लीक के खिलाफ चले देशव्यापी छात्र आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री और केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के तीन दिन बाद नया विवाद शुरू हो गया, एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि केंद्र ने पहले प्रधान को

Centre Portfolio Change: इस्तीफे से पहले बदला जा रहा था धर्मेंद्र प्रधान का विभाग ! जानिए क्या है CJP के दावे और BJP की सफाई का सच ?

Centre Portfolio Change: NEET पेपर लीक के खिलाफ चले देशव्यापी छात्र आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री और केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के तीन दिन बाद नया विवाद शुरू हो गया, एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि केंद्र ने पहले प्रधान को मंत्रिमंडल से हटाने के बजाय उनका विभाग बदलने का प्रस्ताव रखा था। रिपोर्ट के अनुसार, Cockroach Janta Party यानी CJP ने इस कथित Centre Portfolio Change प्रस्ताव को ठुकराते हुए साफ कर दिया था कि उसे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ स्वीकार नहीं होगा। वहीँ भाजपा ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह काल्पनि, निराधार और बेबुनियाद बताया है।

पोर्टफोलियो बदलने की पेशकश पर आमने-सामने दो दावे

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, CJP के प्रतिनिधियों आशुतोष रांका और सौरव दास के साथ बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की ओर से कथित रूप से यह विकल्प रखा गया था कि धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से हटाकर कोई दूसरा विभाग दे दिया जाए। रिपोर्ट में दावा किया गया कि CJP प्रतिनिधियों ने इस विकल्प को तुरंत खारिज कर दिया और कहा कि प्रधान को केवल शिक्षा मंत्रालय से हटाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर जाना होगा।

हालांकि भाजपा सांसद और प्रवक्ता संबित पात्रा ने 28 जुलाई को इस दावे का आधिकारिक खंडन किया। उन्होंने कहा कि एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में छपी यह रिपोर्ट पूरी तरह निराधार, काल्पनिक और बेबुनियाद है। पात्रा के मुताबिक इस तरह की रिपोर्टों के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। फिलहाल कथित प्रस्ताव की पुष्टि करने वाला कोई सार्वजनिक सरकारी दस्तावेज सामने नहीं आया है। इसलिए पोर्टफोलियो बदलने की पेशकश को स्थापित तथ्य के बजाय मीडिया रिपोर्ट का दावा ही माना जाएगा।

 

20 जुलाई के संसद मार्च से शुरू हुआ बातचीत का दौर

CJP और केंद्र सरकार के बीच औपचारिक बातचीत की शुरुआत 20 जुलाई को हुई, जब संगठन ने जंतर-मंतर से संसद की ओर ‘संसद चलो’ मार्च निकाला। हजारों प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने से रोकने के दौरान पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया, जबकि कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं। उसी दिन CJP नेताओं ने केंद्र के प्रतिनिधियों से बातचीत की, लेकिन सरकार ने मांगों पर आंतरिक चर्चा के लिए समय मांगा।

CJP प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया था कि जेपी नड्डा के आवास पर हुई बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल के फोन ले लिए गए और उन्हें दो घंटे इंतजार कराने के बाद केवल करीब 10 मिनट बातचीत का मौका मिला। संगठन ने यह भी दावा किया कि उसके प्रतिनिधियों को एक तरह से नजरबंद रखा गया। ये आरोप CJP की ओर से लगाए गए थे; सरकार की तरफ से इन आरोपों की विस्तृत सार्वजनिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

पहली बातचीत के बाद उसी दिन केंद्र और CJP के बीच संपर्क का दूसरा दौर भी हुआ, लेकिन कोई अंतिम समझौता नहीं बन पाया। आंदोलनकारियों का कहना था कि सरकार केवल बातचीत का संदेश देने के बजाय मांगों पर स्पष्ट फैसला करे।

 

नड्डा को सौंपे ज्ञापन में रखी गईं तीन मुख्य मांगें

CJP ने जेपी नड्डा को सौंपे अपने ज्ञापन में तीन प्रमुख मांगें रखी थीं। इनमें जंतर-मंतर से अस्पताल पहुंचाए गए सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिना शर्त रिहाई, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाना और कथित NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देना शामिल था।

सोनम वांगचुक ने 28 जून को आंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की थी। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद 18 जुलाई को अधिकारियों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। बाद में दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल से उनकी पसंद के गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। उन्होंने 24 जुलाई को 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म की।

 

आंदोलन बढ़ा तो CJP ने नड्डा के आवास पर जाने से किया इनकार

संसद मार्च के बाद प्रदर्शन दिल्ली से बाहर दूसरे शहरों तक फैलने लगे। इसके बाद CJP प्रतिनिधियों ने कहा कि अगली बैठक जेपी नड्डा के आवास पर नहीं, बल्कि किसी तटस्थ स्थान पर होनी चाहिए। संगठन ने आरोप लगाया कि पिछली बैठक में उसके प्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं हुआ था।

CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि संगठन अब केवल प्रतीकात्मक बैठकों या तस्वीरों के लिए बातचीत नहीं करेगा। उनके अनुसार सरकार को या तो कुछ मांगें स्वीकार करनी होंगी अथवा यह स्पष्ट करना होगा कि उन्हें पूरा करने में कितना समय लगेगा। इस दौरान प्रधान का इस्तीफा CJP की सबसे प्रमुख और समझौता न किए जाने वाली मांग बना रहा। संगठन पहले ही कह चुका था कि प्रधानमंत्री की परीक्षा सुधार संबंधी घोषणा जवाबदेही के मूल सवाल को संबोधित नहीं करती।

 

संविधान क्लब में तीसरी बैठक, कुछ घंटे बाद इस्तीफा

आखिरकार सरकार और CJP के बीच तीसरे दौर की बैठक 25 जुलाई को संविधान क्लब में आयोजित की गई। बैठक समाप्त होने के कुछ ही घंटों बाद धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि देश और आंदोलन स्थल की परिस्थितियों को देखते हुए तथा स्थिति का फायदा “राष्ट्रविरोधी ताकतें” न उठा सकें, इसलिए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया। इसके बाद CJP ने सद्भावना के आधार पर अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा की।

CJP नेताओं ने दावा किया कि बातचीत में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिल्ली और भाजपा अथवा NDA शासित राज्यों में दर्ज मामलों को वापस लेने तथा अन्य मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन मिला था। हालांकि बाद में संगठन ने कुछ राज्यों में छात्रों के खिलाफ जारी कथित पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समझौते का पालन नहीं हुआ तो आंदोलन फिर शुरू हो सकता है। इससे साफ है कि दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के क्रियान्वयन को लेकर सवाल पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।

 

संसद के मकर द्वार पर प्रधान का शक्ति प्रदर्शन

इस्तीफे के बाद संसद पहुंचने पर धर्मेंद्र प्रधान का भाजपा और NDA सांसदों ने जोरदार स्वागत किया। सांसद उनके आने से पहले संसद के मकर द्वार पर जमा हुए और उनके पहुंचते ही नारे लगाकर उन्हें भीतर ले गए। पार्टी नेताओं ने उन्हें पारंपरिक टोपी पहनाकर समर्थन जताया। यह स्वागत ऐसे समय हुआ, जब विपक्ष प्रधान के इस्तीफे को छात्र आंदोलन की जीत बता रहा था।

उसी दौरान कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने प्रधान के पास जाकर उनसे कहा, “ऐसा होता है।” इस पर प्रधान ने जवाब दिया, “कुछ नहीं हुआ। मैं स्ट्रीट फाइटर हूं, एसी कमरे का एक्टिविस्ट नहीं।” इस बयान को भाजपा की ओर से यह संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा गया कि इस्तीफे के बावजूद प्रधान राजनीतिक रूप से सक्रिय बने रहेंगे।

 

विपक्ष ने लगाया छात्रों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग का आरोप

एक ओर NDA सांसद प्रधान के समर्थन में खड़े थे, वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सहित विपक्षी नेताओं ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष ने “शिक्षा चोरी” के नारे लगाए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई के लिए माफी मांगने की मांग की।

यह राजनीतिक टकराव उस समय सामने आया, जब मानसून सत्र में कई दिनों के हंगामे के बाद संसद में पेपर लीक रोकने वाले मौजूदा कानून में संशोधन करने वाला विधेयक पेश किया गया। छात्र आंदोलन और विपक्ष लगातार यह सवाल उठा रहे थे कि केवल नया कानून बनाने के बजाय परीक्षा तंत्र की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

 

नए एंटी-पेपर लीक बिल में सजा 10 साल तक

केंद्र सरकार ने 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पेश किया। यह विधेयक 2024 के मौजूदा कानून को और सख्त बनाने के लिए लाया गया है। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य पेपर लीक, नकल, प्रतिरूपण और संगठित परीक्षा अपराधों के मामलों में तेज जांच, समयबद्ध सुनवाई और कड़ी सजा सुनिश्चित करना है।

प्रस्तावित कानून के तहत अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति के लिए सजा की न्यूनतम अवधि तीन साल से बढ़ाकर पांच साल और अधिकतम अवधि पांच साल से बढ़ाकर 10 साल करने का प्रस्ताव है। ऐसे व्यक्ति पर अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया जाएगा।

परीक्षा कराने वाली सेवा प्रदाता कंपनी के शामिल होने पर अधिकतम जुर्माना एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये और सरकारी परीक्षा कार्य से प्रतिबंध की अवधि चार साल से बढ़ाकर आठ साल की जाएगी। सेवा प्रदाता के जिम्मेदार प्रबंधकीय अधिकारियों के लिए भी पांच से 10 साल की सजा और अधिकतम पांच करोड़ रुपये जुर्माने का प्रस्ताव है।

संगठित अपराध की स्थिति में न्यूनतम सजा पांच से बढ़ाकर सात साल की जाएगी, जबकि अधिकतम सजा 10 साल रहेगी। ऐसे मामलों में न्यूनतम जुर्माने को एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रावधान है। सरकार विशेष जांच दल बना सकेगी, जांच दो महीने में पूरी करनी होगी और विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट को आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमा पूरा करने का लक्ष्य दिया जाएगा। हाईकोर्ट में अपील 30 दिन के भीतर करनी होगी और उसका निपटारा भी यथासंभव तीन महीने में किया जाएगा।

 

Centre Portfolio Change विवाद का असली सवाल

इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह नहीं है कि धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया या नहीं, क्योंकि उनका इस्तीफा सार्वजनिक रूप से दर्ज तथ्य है। विवाद यह है कि क्या इस्तीफे से पहले सरकार ने उन्हें कोई दूसरा मंत्रालय देने का विकल्प CJP के सामने रखा था।

एक ओर मीडिया रिपोर्ट ने सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा कि ऐसा प्रस्ताव रखा गया और CJP ने उसे खारिज कर दिया। दूसरी ओर भाजपा के अधिकृत प्रवक्ता ने इसे पूरी तरह काल्पनिक और बेबुनियाद बताया है। सरकार और CJP की बातचीत का कोई सार्वजनिक कार्यवृत्त जारी नहीं किया गया है। इसलिए किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम सत्य मानना अभी संभव नहीं है। तथ्यात्मक रूप से सही स्थिति यही है कि Centre Portfolio Change प्रस्ताव की खबर मीडिया सूत्रों पर आधारित है और BJP ने उसका औपचारिक खंडन किया है।

 

FAQs

1. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले केंद्र ने क्या प्रस्ताव दिया था?

एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि केंद्र ने धर्मेंद्र प्रधान को मंत्रिमंडल से हटाने के बजाय उनका मंत्रालय बदलने का विकल्प CJP के सामने रखा था। BJP ने इस दावे को काल्पनिक और निराधार बताया है।

 

2. CJP ने पोर्टफोलियो बदलने का प्रस्ताव क्यों ठुकराया?

रिपोर्ट के मुताबिक CJP का कहना था कि केवल शिक्षा मंत्रालय से हटाने पर जवाबदेही तय नहीं होगी। संगठन धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाने की मांग पर अड़ा था। हालांकि BJP का कहना है कि ऐसा कोई प्रस्ताव दिया ही नहीं गया था।

 

3. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मुख्य वजह क्या बताई जा रही है?

उनका इस्तीफा NEET परीक्षा रद्द होने, कथित पेपर लीक, देशव्यापी छात्र प्रदर्शन और CJP की लगातार मांग के बीच आया। प्रधान ने अपने बयान में देश की स्थिति और आंदोलन का फायदा राष्ट्रविरोधी ताकतों द्वारा उठाए जाने की आशंका का उल्लेख किया था।

 

4. क्या यह मामला पेपर लीक विवाद से जुड़ा है?

हां। NEET 2026 परीक्षा कथित पेपर लीक के बाद रद्द की गई थी और जून में दोबारा आयोजित हुई। इसी मामले को लेकर CJP का आंदोलन बढ़ा और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग इसका प्रमुख मुद्दा बनी।

 

5. CJP की प्रमुख मांगें क्या थीं?

संगठन की मुख्य मांगों में सोनम वांगचुक से जुड़ी कार्रवाई समाप्त करना, धर्मेंद्र प्रधान को हटाना और पेपर लीक विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देना शामिल था।

 

6. सरकार ने इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया दी?

सरकार ने CJP नेताओं से कई दौर की बातचीत की, परीक्षा व्यवस्था में सुधार की घोषणा की और एंटी-पेपर लीक कानून में कठोर संशोधन वाला विधेयक लोकसभा में पेश किया। वहीं BJP ने प्रधान का पोर्टफोलियो बदलने की कथित पेशकश वाली रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया।

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