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Exam Reform Task Force: परीक्षा प्रणाली बदलने की तैयारी में मोदी सरकार, नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में बनी हाईपावर टास्क फोर्स; जानिए पूरा प्लान..

छात्रों का आंदोलन समाप्त होने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Exam Reform Task Force के गठन का ऐलान किया। इस छह सदस्यीय उच्चस्तरीय टास्क फोर्स की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी करेंगे। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल पेपर लीक रोकना नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को

Exam Reform Task Force: परीक्षा प्रणाली बदलने की तैयारी में मोदी सरकार, नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में बनी हाईपावर टास्क फोर्स; जानिए पूरा प्लान..

छात्रों का आंदोलन समाप्त होने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Exam Reform Task Force के गठन का ऐलान किया। इस छह सदस्यीय उच्चस्तरीय टास्क फोर्स की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी करेंगे। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल पेपर लीक रोकना नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी, तकनीक आधारित और विश्वसनीय बनाना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम करीब सात बजे इंस्टाग्राम पर वीडियो संदेश जारी कर इस फैसले की जानकारी दी। पिछले चार दिनों में इंस्टाग्राम पर यह उनका तीसरा वीडियो संदेश था। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। जिन लोगों ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, वे जेलों में हैं। सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला लिया है और संसद में कठोर सजा वाले कानून में संशोधन भी लाया जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केवल दोषियों को सजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार जरूरी हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की परीक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिस पर हर छात्र और अभिभावक भरोसा कर सके। इसके लिए आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाएगा। इसी उद्देश्य से नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में हाईपावर टास्क फोर्स बनाई गई है, जो देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों का रोडमैप तैयार करेगी।

सरकार ने परीक्षा सुधार के लिए किन विशेषज्ञों को चुना

सरकार ने इस टास्क फोर्स में केवल शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों को ही नहीं, बल्कि तकनीक, अंतरिक्ष, सुरक्षा, प्रशासन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े अनुभवी लोगों को भी शामिल किया है। सरकार का मानना है कि परीक्षा प्रणाली केवल प्रश्नपत्र तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें साइबर सुरक्षा, डेटा प्रबंधन, प्रश्नपत्र की सुरक्षित ढुलाई, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई पहलू जुड़े हैं।

इस टास्क फोर्स की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी करेंगे। उनके साथ इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी, शिक्षा मंत्रालय की पूर्व सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं। इन सभी विशेषज्ञों को अलग-अलग क्षेत्रों का लंबा अनुभव है और सरकार इन्हीं अनुभवों के आधार पर नई परीक्षा प्रणाली तैयार करना चाहती है।

आखिर नंदन नीलेकणी को ही जिम्मेदारी क्यों मिली

देश में बड़े स्तर पर डिजिटल परिवर्तन की बात होती है तो नंदन नीलेकणी का नाम सबसे पहले लिया जाता है। वे केवल इंफोसिस के सह-संस्थापक ही नहीं, बल्कि भारत के कई बड़े डिजिटल सरकारी प्रोजेक्ट्स का भी नेतृत्व कर चुके हैं। माना जाता है कि बड़े पैमाने पर सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने का उनका अनुभव परीक्षा प्रणाली को तकनीक आधारित बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

वर्ष 2009 में उन्हें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का पहला अध्यक्ष बनाया गया था, जहां उन्होंने आधार परियोजना की शुरुआत का नेतृत्व किया। इसके बाद 2010 में वे वित्त मंत्रालय के Technology Advisory Group for Unique Projects (TAGUP) के अध्यक्ष बने। इसी वर्ष उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ई-गवर्नेंस मानव संसाधन नीति विशेषज्ञ समिति की भी अध्यक्षता की।

डिजिटल गवर्नेंस में उनकी भूमिका आगे भी जारी रही। वर्ष 2024 में उन्हें Open Network for Digital Commerce (ONDC) की सलाहकार परिषद का सदस्य बनाया गया। वर्ष 2025 में वे India Energy Stack Task Force के मुख्य मार्गदर्शक बने और अब 2026 में उन्हें राष्ट्रीय Exam Reform Task Force की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लगातार कई महत्वपूर्ण सरकारी समितियों का हिस्सा रहने के कारण उन्हें देश के सबसे अनुभवी टेक्नोलॉजी नीति विशेषज्ञों में गिना जाता है।

पीएम मोदी के लगातार वीडियो संदेशों के क्या मायने हैं

NEET पेपर लीक विवाद के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार सीधे सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार छात्रों और युवाओं से संवाद किया। 23 जुलाई की रात उन्होंने करीब ढाई मिनट का वीडियो जारी कर कहा कि पेपर लीक कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि यह लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई महीनों में सरकार ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और छात्रों का शैक्षणिक वर्ष खराब न हो, इसलिए कम समय में लगभग 22 लाख अभ्यर्थियों की परीक्षा दोबारा कराई गई तथा 19 जुलाई को परिणाम भी घोषित कर दिए गए।

इसी वीडियो में उन्होंने यह भी घोषणा की कि पेपर लीक मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि सरकार जल्द ही संसद में ऐसा कानून लाएगी, जिसमें दोषियों के लिए पहले से अधिक कठोर सजा का प्रावधान होगा।

इसके अगले दिन 24 जुलाई को प्रधानमंत्री ने एक और वीडियो संदेश जारी किया। इसमें उन्होंने पिछली वीडियो पर मिले सुझावों के लिए लोगों का धन्यवाद किया और कहा कि छात्रों तथा नागरिकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया सरकार के लिए महत्वपूर्ण है। लगातार दो वीडियो संदेशों के बाद तीसरे वीडियो में उन्होंने परीक्षा सुधार के लिए हाईपावर टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार इस पूरे मुद्दे पर केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में दीर्घकालिक सुधार भी करना चाहती है।

 

छात्र आंदोलन से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक, कैसे बदला पूरा घटनाक्रम

3 मई 2026 को आयोजित NEET UG परीक्षा में कथित पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद देशभर में छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ता गया। सोशल मीडिया पर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग तेज हुई। इसी दौरान 16 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से एक अभियान शुरू हुआ, जिसने धीरे-धीरे छात्रों के आंदोलन का रूप ले लिया। इस अभियान के जरिए छात्रों ने पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाई और सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की।

इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब 36 दिनों तक लगातार प्रदर्शन चला। आंदोलन में शामिल छात्र परीक्षा प्रणाली में सुधार, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे थे। लंबे समय तक चले इस विरोध प्रदर्शन के बाद 25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया कि परीक्षा सुधार की प्रक्रिया अब भी जारी रहेगी।

संसद में आने वाला नया कानून क्या बदलेगा

सरकार ने परीक्षा सुधार को केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रखा, बल्कि कानूनी व्यवस्था को भी मजबूत करने का फैसला किया। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने संसद में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पेश करने की घोषणा की। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह इस विधेयक को लोकसभा में पेश करेंगे।

यह विधेयक वर्ष 2024 में बने कानून में संशोधन करेगा। सरकार का उद्देश्य पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में पहले से अधिक कठोर दंड व्यवस्था लागू करना है। प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा और भारी आर्थिक जुर्माने का प्रावधान किया जाएगा। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का अधिकार मिलेगा, जहां रोजाना सुनवाई कर मामलों का जल्द निपटारा किया जा सके।

सरकार का मानना है कि केवल गिरफ्तारी से ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकती। जब तक मामलों का समयबद्ध फैसला नहीं होगा और दोषियों को शीघ्र सजा नहीं मिलेगी, तब तक परीक्षा माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाना मुश्किल रहेगा।

परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती

नई Exam Reform Task Force के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करना होगी, जिसमें पेपर लीक, डिजिटल हैकिंग, पहचान की धोखाधड़ी और प्रश्नपत्र की सुरक्षा जैसी समस्याओं की संभावना न्यूनतम हो। इसके लिए प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर परीक्षा परिणाम घोषित होने तक पूरी प्रक्रिया का तकनीकी और प्रशासनिक मूल्यांकन किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की परीक्षा प्रणाली में डिजिटल सुरक्षा, एन्क्रिप्शन, डेटा सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सुरक्षित लॉजिस्टिक्स और रियल-टाइम निगरानी जैसी तकनीकों का अधिक उपयोग किया जा सकता है। हालांकि सरकार ने अभी तक टास्क फोर्स की विस्तृत सिफारिशें सार्वजनिक नहीं की हैं। इसलिए अंतिम सुधारों का स्वरूप टास्क फोर्स की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

 

क्या केवल NEET ही नहीं, पूरी परीक्षा व्यवस्था बदलेगी

प्रधानमंत्री मोदी के बयान और टास्क फोर्स के उद्देश्य से संकेत मिलता है कि सरकार केवल NEET परीक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहती। इसका उद्देश्य ऐसी व्यापक परीक्षा प्रणाली विकसित करना है, जिसे भविष्य में अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में भी लागू किया जा सके। इससे भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

यही कारण है कि इस टास्क फोर्स में शिक्षा क्षेत्र के साथ-साथ टेक्नोलॉजी, सुरक्षा, प्रशासन और लॉजिस्टिक्स के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, ताकि परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण की अलग-अलग दृष्टिकोण से समीक्षा की जा सके।

 

FAQ

  1. पीएम मोदी ने Exam Reform Task Force की घोषणा क्यों की?
    NEET पेपर लीक विवाद, छात्रों के आंदोलन और परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत को देखते हुए सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए यह टास्क फोर्स बनाई है।
  2. Exam Reform Task Force का नेतृत्व कौन करेगा?
    इस छह सदस्यीय उच्चस्तरीय टास्क फोर्स की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणी करेंगे।
  3. नंदन नीलेकणी की इस कार्यबल में क्या भूमिका होगी?
    वे टास्क फोर्स के अध्यक्ष के रूप में परीक्षा प्रणाली में तकनीक आधारित सुधारों का रोडमैप तैयार करने और विशेषज्ञों के काम का नेतृत्व करेंगे।
  4. इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, विश्वसनीय और तकनीक आधारित बनाना है, ताकि भविष्य में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को रोका जा सके।
  5. क्या यह टास्क फोर्स केवल पेपर लीक रोकने के लिए बनाई गई है?
    नहीं। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य केवल पेपर लीक रोकना नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करना और भविष्य के लिए भरोसेमंद परीक्षा तंत्र विकसित करना है।
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